हमजोली चटखती धूप में नंगे सिर नंगे पाँव झुलसता हुआ बदन लिए सुनसान सड़क पर एक काली सियाह छाया दौड़-दौड़कर छाँव में कदम रखती कभी दम भरने पेड़…
और पढ़ेंआज जी चाहता है जी चाहता है इन हवाओं को अपने दामन में बाँध लूँ बादलों को अपने पपोटों से छूकर बेमानी कर दूँ इस सूरज को छुऊँ और छूकर ब…
और पढ़ेंभूख तालाब के किनारे बैठे-बैठे कितने ही ख़्वाब बुन डाले थे अदनी-सी अठन्नी को लेकर कभी रसगुल्ला , कभी जलेबी लेकिन जब मुठ्ठी खोली थी तो अठन…
और पढ़ेंअब्रों का ग़म काले अब्रों को जाने क्या ग़म था या शायद मेरे ग़म पर रो रहे थे इन्हें देख-देख मेरा ग़म बढ़ रहा था मैं ख़्यालों की नदी में डूबती- उ…
और पढ़ेंमहबूब का पता मुझसे ग़र कोई पूछे मेरे महबूब का पता कहूँगी रहता है गुलशन की फ़िज़ाओं में महकाता है फूलों को बसकर हवाओं में मुझसे ग़र कोई …
और पढ़ेंअबला बेटी --- माँ , मेरी चिठ्ठी आई है पति ने दहेज की रकम मंगाई है और लिखा है ' गर तू न लाई पैसे तो ससुराल न आना …
और पढ़ेंसमय बड़ा बलवान है समय बड़ा बलवान है इसका सदुपयोग महान है काम को कल पर मत टालो आज का आज ही कर डालो। मानव जीवन क्षणभंगुर है प्रत्येक क्षण…
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